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हरेली तिहार पर सजा छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ के पहली तिहार पर मुख्यमंत्री साय से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल तक दिखा पर्व का रंग

Rashtriya Seva Johar / Thu, Aug 13, 2026 / Post views : 14

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ का पहला लोक पर्व हरेली तिहार बुधवार को पूरे प्रदेश में उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। गांवों से लेकर शहरों तक हरेली के रंग देखने को मिले। कृषि और प्रकृति से जुड़े इस पर्व पर लोगों ने कृषि उपकरणों की पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली एवं किसानों की समृद्धि की कामना की।

कृषि परंपरा, लोक संस्कृति और हरियाली के उत्सव में दिखी छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत; बस्तर से तिरंगा यात्रा का भी आगाज

मुख्यमंत्री निवास में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक:

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास में हरेली तिहार के अवसर पर विशेष आयोजन हुआ। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपराओं और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली। आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेली पर्व मनाया गया।

मुख्यमंत्री साय ने हरेली को छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया। इस अवसर पर किसानों और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई। हरेली के माध्यम से कृषि उपकरणों और खेती-किसानी से जुड़े संसाधनों के प्रति सम्मान की परंपरा भी निभाई गई।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी मनाया हरेली:

हरेली के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पर्व से जुड़े आयोजन में शामिल हुए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और खेती-किसानी से जुड़े इस पर्व की शुभकामनाएं दीं।

हरेली तिहार राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए भी प्रदेश की संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ने का अवसर रहा। मुख्यमंत्री साय और पूर्व मुख्यमंत्री बघेल सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने प्रदेशवासियों को हरेली की बधाई दी।

मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने भी निभाई परंपरा:

हरेली के अवसर पर प्रदेश के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने भी अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की बधाई दी। वहीं कई स्थानों पर कृषि उपकरणों की पूजा, पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन हुए।

बस्तर से तिरंगा यात्रा का आगाज:

हरेली के साथ ही प्रदेश में राष्ट्रभक्ति से जुड़े आयोजनों की शुरुआत भी हुई। बस्तर में नारायणपुर से तिरंगा यात्रा का आगाज किया गया। यात्रा के माध्यम से शांति, एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया गया। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर बस्तर अंचल में होने वाले आयोजनों में लोगों की भागीदारी देखने को मिली।

खेती-किसानी और प्रकृति से जुड़ा है हरेली:

हरेली केवल एक त्योहार नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। खेती के मौसम में मनाए जाने वाले इस पर्व पर किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और अच्छी फसल तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हरेली के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक खेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्थानीय परंपराओं का भी आयोजन किया गया। इससे नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ने का अवसर मिला।

हरेली ने फिर याद दिलाई छत्तीसगढ़ की पहचान:

मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और आम लोगों तक, हरेली तिहार ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की माटी, खेती, प्रकृति और लोक संस्कृति से जुड़ी पहचान को सामने रखा। प्रदेशभर में मनाए गए इस पर्व ने ग्रामीण परंपराओं और आधुनिक जीवन के बीच छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की मजबूत कड़ी को भी प्रदर्शित किया।

Tags :

Raipur

Chhattisgarh

Hareli Tihar

Bhupesh Baghel

Vishnu Dev Sai

CM of Chhattisgarh

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