नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश (FDI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टैक्स व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार जल्द ही Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश कर सकती है। प्रस्तावित विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, विदेशी निवेशकों, डेटा सेंटर, REITs, InvITs और सरकारी बॉन्ड में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कर राहतों का प्रस्ताव शामिल है।इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 2040-41 तक मिल सकती है टैक्स राहतप्रस्तावित बिल के तहत मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल डिवाइस और उनके कंपोनेंट्स की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मिलने वाली टैक्स छूट की अवधि वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ाई जा सकती है।इसके अलावा, कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी इसी अवधि तक कर राहत देने का प्रस्ताव है। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होने और देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।विदेशी निवेशकों के लिए नियम होंगे आसानविधेयक में विदेशी निवेश फंड से जुड़े कई नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है। इसमें निवेशकों की न्यूनतम संख्या, न्यूनतम कोष (Minimum Corpus), निवेश विविधीकरण और संबद्ध संस्थाओं में निवेश से जुड़े प्रावधानों में ढील शामिल है।विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से वैश्विक फंड मैनेजरों के लिए भारत में निवेश करना पहले से अधिक आसान होगा।सरकारी बॉन्ड में निवेश को मिलेगा बढ़ावासरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और Bank for International Settlements (BIS) के पास मौजूद सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर टैक्स छूट देने की तैयारी कर रही है।इस कदम से भारतीय सरकारी बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकते हैं और देश में दीर्घकालिक विदेशी पूंजी निवेश बढ़ने की संभावना है।REITs, InvITs और डेटा सेंटर सेक्टर को भी राहतप्रस्तावित संशोधन में REITs और InvITs को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट दोबारा लागू करने का प्रस्ताव है।साथ ही, भारत में तेजी से विकसित हो रहे डेटा सेंटर सेक्टर के लिए भी कर नियमों को सरल बनाने की योजना है। प्रस्ताव के अनुसार, भारत में लीज पर संचालित डेटा सेंटर सेवाओं का उपयोग करने वाली विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत मिल सकती है। इसके अलावा, स्पेसिफाइड डेटा सेंटर की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।हीरा कारोबार और SPV के लिए भी बदलावविधेयक में अधिसूचित विशेष क्षेत्रों के माध्यम से रफ डायमंड की बिक्री करने वाली विदेशी कंपनियों को दीर्घकालिक टैक्स राहत देने का प्रस्ताव है। इसका लाभ डायमंड माइनिंग कंपनियों, ब्रोकर्स, साइटहोल्डर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन कंपनियों को मिल सकता है।वहीं, नई कॉरपोरेट टैक्स व्यवस्था चुनने वाले SPV (Special Purpose Vehicle) के लिए सरचार्ज बढ़ाकर 25% करने का प्रस्ताव है, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों के लिए यह 10% ही रहेगा।निवेश और कारोबार को मिलेगा बढ़ावाकर विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन भारत को अधिक स्थिर, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल टैक्स व्यवस्था देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, REITs, InvITs और सरकारी बॉन्ड जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा और भारत को वैश्विक निवेश एवं विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की रणनीति को मजबूती मिलेगी।Read More: प्रधानमंत्री ने शुरू किया 100 हफ्तों का ‘नशा मुक्त युवा अभियान’, युवाओं से लिया संकल्प