Rashtriya Seva Johar / Fri, Aug 14, 2026 / Post views : 16
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में लंबे समय से चले आ रहे नक्सल प्रभावित दौर के बीच अब बदलाव की एक अलग तस्वीर सामने आई है। कभी माओवादी संगठन से जुड़ी रहीं बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में रैंप वॉक किया। पारंपरिक हथकरघा और कोसा परिधानों में सजी इन महिलाओं ने आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा।
बंदूक छोड़कर नई राह की ओर:
यह आयोजन सिर्फ फैशन शो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यधारा में लौटने और पुनर्वास की एक अलग तस्वीर के रूप में सामने आया। कभी बस्तर के जंगलों में माओवादी गतिविधियों से जुड़ी इन महिलाओं ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में नई जिंदगी शुरू की है।

रैंप पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी हथकरघा परिधान पहनकर उनका आत्मविश्वास यह संदेश देता नजर आया कि जिंदगी में बदलाव का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
9 पूर्व महिला नक्सलियों ने लिया हिस्सा:
रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में बस्तर क्षेत्र की 9 पूर्व महिला माओवादी कैडरों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अन्य मॉडलों के साथ रैंप पर पारंपरिक हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में 12 अन्य मॉडल और Femina Miss India East 2026 भी शामिल थीं।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। पूर्व महिला नक्सलियों की इस नई भूमिका को कार्यक्रम में खूब सराहना मिली।
कोसा और हथकरघा बना पहचान:
रैंप वॉक के दौरान महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा सिल्क और हथकरघा परिधानों को प्रदर्शित किया। इससे कार्यक्रम का उद्देश्य केवल फैशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की स्थानीय बुनाई, पारंपरिक वस्त्र और आदिवासी संस्कृति को भी सामने लाना रहा।
पुनर्वास और महिला सशक्तिकरण की मिसाल:
इस आयोजन को पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंसा और संघर्ष से दूर होकर मुख्यधारा में लौटने वाली महिलाओं के लिए सामाजिक स्वीकार्यता और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रायपुर का यह आयोजन इसी बदलाव की एक तस्वीर सामने लाता है—जहां कभी हाथों में हथियार होने की पहचान थी, वहीं अब उन्हीं महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और परिधान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया।
बस्तर की बदली तस्वीर:
बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सल हिंसा और संघर्ष से जोड़ी जाती रही है। ऐसे में पूर्व महिला नक्सलियों का हथकरघा परिधान पहनकर रैंप पर उतरना बस्तर की बदलती तस्वीर का प्रतीकात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।
यह कहानी केवल रैंप वॉक की नहीं, बल्कि एक कठिन अतीत से निकलकर नई जिंदगी, सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की कहानी भी है।
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