Simran Mallick / Fri, Aug 7, 2026 / Post views : 2
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 में कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाते हुए सेवानिवृत्त IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना बेहद गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों अभ्यर्थियों के करियर और भविष्य पर असर पड़ता है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराना लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक व्यक्ति की हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन पेपर लीक से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का करियर प्रभावित होने के साथ पूरे समाज पर असर पड़ता है। इसी गंभीरता के आधार पर कोर्ट ने मामले को सामान्य अपराध की श्रेणी में रखने से इनकार किया।
पूर्व CGPSC सचिव पर क्या हैं आरोप?
जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020-2022 के दौरान CGPSC के सचिव पद पर कार्यरत थे। CBI ने उन्हें सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 की गोपनीय प्रश्नपत्र सामग्री को अपने पास रखा और उसे अपने बेटे तक पहुंचाया। मामले में उनके बेटे सुमित ध्रुव को भी आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट के समक्ष अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि जांच के दौरान ध्रुव के आवास से परीक्षा से संबंधित प्रश्न और उत्तर सामग्री बरामद हुई थी। साथ ही, गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का भी हवाला दिया गया। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन सामग्रियों को आरोपी की कथित भूमिका से जोड़ते हुए जमानत देने से इनकार किया।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
आज की तारीख में बड़ा अपडेट: हाईकोर्ट का यह आदेश 7 अगस्त 2026 को सामने आया है और CGPSC पेपर लीक मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी को लेकर यह मामला चर्चा में है।
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